पंजाब के सुनहरे खेतों के बीच, बठिंडा के एक छोटे से गाँव में सिमरन रहती थी। गेहुँआ रंग, नटखट आँखें, और सिर पर हमेशा सूती साड़ी का आंचल – वह बिल्कुल वैसी ही थी जैसी हर पंजाबी माँ बेटी को चाहती है। उसकी शादी अमृतसर के एक शांत स्वभाव के युवक हरप्रीत सिंह से हुई। हरप्रीत एक कंप्यूटर इंजीनियर था, जिसकी दुनिया कोड और साइलेंस में बसती थी।
शादी के बाद सिमरन वैसी ही थी जैसे कि एक typical पंजाबी बहु होती है– सास-ससुर की सेवा करने वाली, रसोई में लज़ीज़ पनीर की सब्जियाँ बनाने वाली, और रात को हरप्रीत के सीने पर सिर रखकर सोने वाली। सब कुछ सामान्य था। उसने जिम जाने जैसा कुछ नहीं सोचा था, न ही कभी आईने में अपने चेहरे को गौर से देखा था। वह बस "सिमरन, दुल्हन बन के आई" थी, जैसे पंजाबी गानों की लड़कियाँ।
भाग 2: बीमारी का साया – PCOS का कहर
शादी को छह महीने बीत चुके थे। एक दिन सिमरन ने देखा कि उसकी त्वचा पर बाल बढ़ने लगे हैं। पहले तो उसने इग्नोर किया – "गरम खाने का असर होगा।" लेकिन धीरे-धीरे उसकी ठुड्डी पर मर्दों के समान बाल आने लगे। मूंछों पहले से ज्यादा गहरी हो गई, फिर दाढ़ी? एक महिला को दाढ़ी? उसके रोंगटे खड़े हो गए।
डॉक्टर के पास भागना, फिर एंडोक्राइनोलॉजिस्ट के पास, और फिर वो दिन आया जब डॉक्टर ने सीधे शब्दों में कहा – "पीसीओएस। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम। आपके शरीर में एण्ड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का स्तर अचानक बढ़ गया है। यह असामान्य नहीं है, लेकिन आपके केस में यह तेजी से बदलाव ला रहा है।"
सिमरन के चेहरे पर वह नाजुकपन, वह स्त्रीत्व – सब धूमिल होने लगा। गांव वालों ने फुसफुसाना शुरू कर दिया। "देखो, सिमरन को तो दाढ़ी आ गई। कहीं अजीब बीमारी तो नहीं?" सास ने एक दिन कह दिया – "बहू, shaving kar लिया कर, ऐसे तो हमारे घर की इज़्ज़त नहीं रहेगी।"
भाग 3: पति का सपोर्ट – प्यार की पहली दाढ़ी
उस रात सिमरन ने बाथरूम में रेजर लेके शेविंग करने जा ही रही थी कि तभी हरप्रीत अंदर आया। उसने धीरे से उसके हाथ से रेजर लिया और कहा – "रुक जा। ये मैटर नहीं करता मुझे लगता है मुझे तू मर्दानी ज्यादा पसंद है।"
सिमरन ने आश्चर्यचकित होते हुए कहा, "अब मैं औरत नहीं रही, हरप्रीत। दाढ़ी आ गई मुझे!"
हरप्रीत ने शीशे में अपनी पत्नी के चेहरे को पूरे गौर से देखा। उसने कहा – "दाढ़ी सिर्फ बाल हैं, सिमरन। प्यार बालों से नहीं होता। अगर तुम्हें दाढ़ी रखनी है तो रखो। मैं तुमसे प्यार करता हूँ पर दाढ़ी रखोगी तो मुझे ज्यादा अच्छा लगेगा।"
उसने फिर उस से कहा – "डॉक्टर ने कहा जिम जॉइन कर लो, इससे हार्मोन बैलेंस होगा। मैं भी चलूंगा। और हाँ, अगर दाढ़ी है तो है, मैं तुम्हें गले लगाऊंगा दाढ़ी के साथ या बिना दाढ़ी के।"
पति का यह सपोर्ट सिमरन के लिए दवा से बढ़कर था।
भाग 4: बीवी से मर्द – शरीर और मन का बदलाव
धीरे-धीरे सिमरन ने जिम जॉइन किया। डेडलिफ्ट, स्क्वाट्स, बेंच प्रेस – जैसे-जैसे उसकी मसल्स ग्रो हुई, उसकी कंधों की चौड़ाई बढ़ी। टेस्टोस्टेरोन ने उसकी आवाज़ थोड़ी भारी कर दी। उसके चेहरे पर अब घनी दाढ़ी थी – ठीक वैसी ही जैसी किसी जवान पंजाबी मुंडे को शोभती है। वह अब साड़ी के बजाय ट्रैकसूट और टी-शर्ट पहनने लगी थी।
एक दिन वह जिम से वापस आई, नहाने के बाद तौलिया ओढ़े और बिस्तर पर लेटी हुई थी। हरप्रीत उसके पास आया तो सिमरन ने अचानक उसकी कलाई पकड़ ली और उसे उल्टा पलट दिया। "रुक, आज मेरी बारी है," उसने एक ऐसे अंदाज़ में कहा जो पहले कभी नहीं था।
हरप्रीत चौंका, लेकिन उसे अपनी पत्नी के इस नए रूप में कुछ अनकहा आकर्षण भी महसूस हुआ। सिमरन ने उसे बिस्तर पर दबाया, और फिर वहाँ जो हुआ वह पति-पत्नी के पारंपरिक समीकरण से बिल्कुल अलग था। वह रात हरप्रीत ने "सबमिसिव" रोल में गुज़ारी, जबकि सिमरन ने "डोमिनेंट" रोल में।
रात को बाद में, सिमरन ने हंसते हुए कहा – "लगता है पीसीओएस ने मुझे तुम्हारा 'पति' बना दिया है।"
हरप्रीत ने उसकी दाढ़ी को सहलाते हुए कहा – "तो फिर मैं तुम्हारी 'पत्नी' हूँ।"
भाग 5: रोज़ की रात – प्यार का उल्टा खेल
अब यह उनका रूटीन बन गया। रात होते ही, सिमरन एक नई ऊर्जा से भर जाती। वह हरप्रीत को अपनी गोद में बिठाती, जैसे कोई पति अपनी पत्नी को बिठाता है, और फिर उसे ऊपर-नीचे उछालती। हरप्रीत उसकी दाढ़ी में मुँह छुपा लेता, और यह उसकी नई दुनिया थी।
यहाँ तक कि वे मजाक में एक-दूसरे के कपड़े भी बदल लेते – कभी सिमरन हरप्रीत के बनियान में सोती तो कभी हरप्रीत उसकी नाइटी पहनकर सोने की कोशिश करता (हालाँकि उसमें वह अजीब लगता था)।
और हाँ, रात को जब लाइट बुझती है, तो सिमरन हरप्रीत से कहती है – "अब सो जा, मेरी 'रानी'। कल फिर जिम साथ जाना है। तुझे मेरे हाथों के बने चिकन पकवान खिलाने हैं – बस एक बात, मेरा शेविंग फोम कभी मत उड़ाना, मैं अपनी ये दाढ़ी रखना चाहती हूँ, क्योंकि यही वो वजह है जिसने तुझे मेरा 'पति' बनाया और मुझे तुम्हारा 'पति'।
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भाग 9: द वैक्सीन ऐड – जब मर्दानगी का इंजेक्शन पलट गया
सिमरन और हरप्रीत का यह नया दौर अब गाँव में चर्चा का विषय था। लेकिन अभी एक और मोड़ आना बाकी था – वह मोड़ जिसने उनके रिश्ते को ‘हमेशा के लिए सील’ कर दिया।
दृश्य 1: हँसी-मज़ाक में ‘मन हैंडलिंग’ का मैच
एक दिन शाम को, दोनों सोफे पर बैठे टीवी देख रहे थे। एक पंजाबी गाना चल रहा था – “जट्ट दी टंग” बज रहा था। सिमरन ने मजाक में हरप्रीत से कहा, “ये टंग वाले तुम नहीं हो सकते।”
हरप्रीत ने चुनौती दी, “क्यों? मैं भी जट्ट हूँ।”
सिमरन ने उसकी तरफ देखा, उसकी घनी दाढ़ी में चमक थी, हाथों में स्टील था। उसने कहा, “आँ, तो चल मुकाबला करते हैं। देखते हैं किसकी पकड़ मज़बूत है।”
हरप्रीत हँसा, “कैसा मुकाबला?”
सिमरन ने उसकी कलाई पकड़ी और उसे तकिए पर लिटा दिया। हरप्रीत अभी कुछ समझता, उससे पहले ही सिमरन ने उसकी बेल्ट ढीली की और एक मज़ाकिया अंदाज़ में ‘मैन हैंडलिंग’ शुरू कर दी – लेकिन हाथ से नहीं, पूरे शरीर के दमखम से।
उसने हरप्रीत को बांहों में उठाया, उल्टा पलटा, और बिना किसी लड़ाई के उसे इस कदर दबाया कि हरप्रीत बस बोला – “बस बस… मैं हार गया। तेरी जीत।”
सिमरन ने उसके कान में कहा, “अब जीतना बाकी है, आज रात असली मैच होगा।”
दृश्य 2: साड़ी और दाढ़ी – पीछे से वार
अगले दिन, सिमरन ने कुछ अनोखा किया। उसने अपनी माँ वाली हल्की गुलाबी साड़ी पहनी, बड़ी-बड़ी बिंदी लगाई, चूड़ियाँ पहनीं – लेकिन चेहरे पर वही घनी काली दाढ़ी। दाढ़ी में उसने साफा बाँध लिया था – मानो कोई सरदारनी हो।
हरप्रीत किचन में चाय बना रहा था। पीछे से सिमरन ने उसकी कमर पकड़ी। उसने हरप्रीत को झटके से घुमाया और दीवार से लगा दिया। उसकी दाढ़ी हरप्रीत के गाल को छू रही थी।
सिमरन ने उसके कान में कहा, “आज साड़ी है पर दाढ़ी भी है। अब बता, कौन है तू?”
हरप्रीत की साँसें तेज हो गईं। उसने कहा, “मैं… तेरा हूँ।”
सिमरन ने उसे पीछे से धीरे से धक्का दिया, सीढ़ियों की तरफ। वहाँ, बेडरूम के दरवाजे पर, उसने हरप्रीत को झुकाया और पीछे की पोजीशन में उसे महसूस कराया कि अब सब कुछ उल्टा हो गया है।
दृश्य 3: रिवर्स मिशनरी – जब बीवी बनी ‘मिशनरी’
रात ढल चुकी थी। पूरे घर में सन्नाटा था, बस दो दिलों की धड़कनें एक दूसरे से लिपट रही थीं। सिमरन ने हरप्रीत को बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। यह क्लासिकल ‘मिशनरी’ पोजीशन थी, लेकिन पूरी तरह से रिवर्स।
सिमरन ऊपर थी, उसकी साड़ी बिस्तर पर बिखर गई थी, उसकी दाढ़ी हरप्रीत के चेहरे पर छा रही थी। हरप्रीत नीचे था, उसने आँखें बंद कर ली थीं।
सिमरन ने उसकी ठुड्डी पकड़कर कहा, “अब तक तुम मेरे पति थे। आज से मैं तुम्हारी मालकिन हूँ।”
वह रात कोई साधारण रात नहीं थी। वह रात ‘रिवर्स मिशनरी’ की थी – जहाँ सिमरन हरप्रीत को नीचे दबाए थी, उसके बालों को खींचती, उसकी गर्दन को अपनी दाढ़ी से रगड़ती, और धीरे-धीरे उसे एक ऐसे सुख की चोटी पर ले जाती जहाँ से वापसी संभव नहीं थी।
हरप्रीत ने रात को तीन बार नाम लिया – “सिमरन… बस… अब मैं तेरा हूँ… हमेशा… हमेशा के लिए…”
सिमरन ने अपनी दाढ़ी के बालों को उसके सीने पर रखते हुए कहा, “अब तुम मेरे हो। बिस्तर पर, जिम में, और बाहर दुनिया में – हर जगह। मैं ऊपर, तुम नीचे। यही हमारा नया करार है।”
दृश्य 4: ‘हमेशा के लिए’ – दिनचर्या बन चुकी रिवर्स लव
उसके बाद से वही रूटीन हो गया। हर रात:
· सिमरन बिस्तर पर ऊपर रहती, हरप्रीत नीचे।
· वह उसके बाल खींचती, वह उसकी दाढ़ी में मुँह छुपाता।
· कभी-कभी सिमरन नीचे उतरती भी, लेकिन फिर हँसकर बोलती – “नहीं, मैं तो ऊपर वाली बीवी हूँ।”
· हरप्रीत ने कभी शिकायत नहीं की। बल्कि, उसे इस ‘सरेंडर’ में एक अजीब सी आज़ादी मिली।
एक दिन सिमरन ने पूछा, “तुम्हें बुरा तो नहीं लगता?”
हरप्रीत ने उसकी दाढ़ी को सहलाते हुए कहा, “बुरा? मैं तो दुआ माँगता हूँ कि तुम्हारी ये दाढ़ी कभी न उतरे। यही तो वह इंजेक्शन है जिसने मुझे पहली बार महसूस कराया कि प्यार में ऊपर-नीचे कुछ नहीं होता। बस तुम हो और मैं हूँ। बस तुम ऊपर हो और मैं नीचे – हमेशा।”
The end
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